क्या हम संगीत को सिर्फ़ सुनने की वस्तु मानकर उस आत्मा को भूल रहे हैं जो किसी इंसान ने महसूस की है? विरोधी पक्ष कह सकता है कि एआई गाने भी अच्छे लगते हैं, और यह सही भी है। लेकिन स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ ध्वनि का गोदाम नहीं, कलाकार और श्रोता के बीच का रिश्ता है। जब एआई की बाढ़ आएगी, तो असली कलाकारों की आवाज़ एल्गोरिदम में दब जाएगी। श्रोता को पता भी नहीं चलेगा कि जिस भावना पर वह भरोसा कर रहा है, वह किसी इंसान की नहीं थी। यही मेरी सबसे बड़ी आपत्ति है।